जो हुआ अच्छा हुआ एक राजा की कहानी Jo Hua Acha Hua All is well

जो हुआ अच्छा हुआ एक राजा की कहानी Jo Hua Acha Hua All is well नमस्कार दोस्तों कैसे है आप उम्मीद है अच्छे ही होंगे और आपको नवरात्रों की बहुत – बहुत बधाईया और शुभकामनाएं GOD आपकी सभी इच्छाएं पूरी करें, दोस्तों आपके लिए आज एक जबर्दस्त कहानी लेकर आया हूँ। कहानी पसंद आये तो अपने दोस्तों के साथ जरूर शेयर करें।

जो हुआ अच्छा हुआ Jo Hua Acha Hua
                 जो हुआ अच्छा हुआ Jo Hua Acha Hua All is well

जो हुआ अच्छा हुआ एक राजा की कहानी –  Jo Hua Acha Hua All is well

एक राजा था उसके दरबार में उसके सेनापति का ये मानना था के ईश्वर जो करता है अच्छा ही करता है। और वो हर अच्छी-बुरी घटना पर एक ही बात कहता ईश्वर जो करता है वो अच्छा ही करता है फिर चाहे वो घटना उसके खुद के साथ घटती या किसी और के साथ।

एक दिन राजा अपने दरबार में बैठा अपनी प्रजा की समस्याओं को सुन रहा था  दरबार में राजा के साथ-साथ उनका वज़ीर उनका सेनापति और अन्य दरबारी भी वहाँ उपस्थित थे इतने में वहाँ पर एक अधेड़ उम्र का व्यक्ति आया। और राजा से आज्ञा लेकर उनके सामने एक तलवार पेश की और कहा के हुजूर मैंने ये तलवार कई दिनों की मेहनत के बाद खुद अपने हाथों से बनाई है।

मैं इसे आपको भेंट देना चाहता हूँ ये तलवार बहुत ही तेज है और साथ ही साथ मज़बूत भी युद्ध में या मुसीबत के समय ये आपके बहुत काम आएगी। राजा ने उस तलवार की धार को परखने के लिए जैसे ही उस पर अपनी उंगली और अंगूठे से छुआ। तो राजा की उंगली कट गई और उससे खून बहने लगा।

ये देख सेनापति ने कहा  ईश्वर जो करता है अच्छा करता है जैसा कि वो हमेशा बोलता था जो हुआ अच्छा हुआ 

इस पर राजा मन ही मन नाराज हो गया। और उस सेनापति को सबक सिखाने की सोची।

लेकिन राजा की उंगली से खून बहता देख वो व्यक्ति घबरा गया। कहीं राजा साहब नाराज होकर उसे दण्ड ना दे दें। वो आया तो था ये सोच कर  के राजा साहब तलवार देखकर खुश हो जाएंगे। और शायद उसको ईनाम में कुछ धन दे दें। मग़र उसे लगा कि अब लेने के चक्कर में जान के लाले ना पड़ जाएं। मगर सौभाग्य से ऐसा कुछ नहीं हुआ और राजा ने खुश होकर उस व्यक्ति को कुछ अशर्फियाँ देकर विदा कर दिया।

कुछ दिन बाद राजा ने कहा सेनापति चलो आखेट ( शिकार ) पर चलते हैं राजा तो आख़िर राजा है वो उनकी बात को कैसे टाल सकते थे। सेनापति ने कहा हुजूर  किस दिशा में चलना है और सैनिक कितने साथ लेकर चलें। राजा ने स्थान और दिशा बताते हुए कहा कि आज हम बगैर सैनिकों  के चलेंगे। सिर्फ हम और तुम सेनापति को थोड़ा आश्चर्य तो हुआ लेकिन वो राजा की बात को मानते हुए।

राजा के साथ शिकार पर निकल पड़े घने जंगल में जाने के बाद राजा को एक कुआँ दिखा। राजा ने कहा के सेनापति प्यास लगी है चलो कुए से पानी पीते है वो दोनों कुए के पास पहुँचते है और देखते है कि उसमें तो पानी ही नहीं है जैसे ही सेनापति कुएं में झाँकता है राजा ने उसको पीछे से कुएं के अंदर धक्का दे दिया।

सेनापति कुएं में जा गिरा कुएं में गिरते ही सेनापति ने  फिर कहा ईश्वर जो करता है अच्छा ही करता है  राजा उस पर हँसा और घोड़े पर बैठ वहाँ से चल दिया अभी कुछ दूर ही गया था की उसे जंगल में जंगली आदमियों ने घेर लिया और राजा को पकड़कर अपने कबीले में बने एक मंदिर में ले गए। जहाँ उन्हें अपने देवता को खुश करने के लिए नर बलि देनी थी।

जैसे ही उन्होंने राजा को नहलाकर बलि के लिए तैयार किया उनमें से एक बुजुर्ग का ध्यान राजा की उंगली और अंगूठे पर लगी चोट पर पड़ा। वो चिल्लाया रुको। सब रुके और बोले क्या हुआ। तो उस बुजुर्ग ने कहा के इसको चोट लगी है इसकी बलि देने का कोई फायदा नही इसका अंग भंग है। देवता खुश होने की बजाय नाराज़ हो जाएगा।

फायदे की जगह इस अनुष्ठान का नुकसान ही होगा इसे छोड़ दिया जाना चाहिए। ये सुनकर सबने उसकी चोट को देखा और छोड़ दिया। राजा वहाँ से भागा-भागा उसी कुएं के पास आया जहाँ सेनापति को कुएं में गिराया था और सेनापति को कुएं से बाहर निकाला।

 कुँए से बाहर निकलते ही सेनापति ने फिर कहा ईश्वर जो करता है अच्छा ही करता है। जो हुआ अच्छा हुआ 

राजा सेनापति को महल में लेकर आया और दरबार में उससे माफी माँगी। और कहा सेनापति तुम ठीक कहते हो  ईश्वर जो करता है वो ठीक ही करता है। आज मुझे इस बात का एहसास हो गया है और फिर राजा ने अपनी पूरी कहानी दरबार मे कह सुनाई। की कैसे – कैसे सब हुआ

तुम ठीक कहते हो ईश्वर जो करता है ठीक ही करता है।

मैं तो अंग भंग की वजह से बच जाता लेकिन फिर वो तुम्हारी बलि ज़रूर देते। सेनापति ने कहा हूजूर शुक्र है कुएं में पानी भी नहीं था। वरना जब तक आप आये मैं डूब कर मर जाता। मुझे ज्यादा तैरना भी नहीं आता।

वाकई सेनापति तुम ठीक कहते हो। ईश्वर जो करता है ठीक करता है बस हमें गलत लगता है। जो हुआ अच्छा हुआ 

शिक्षा Jo Hua Acha Hua

कई बार हमारे साथ जिंदगी में कुछ उतार -चढ़ाव आते है। तो हम विचलित हो जाते हैं। और सोचते हैं कि बोहोत बुरा हुआ। और नकारात्मक सोचने लग जाते हैं जबकि जो होता है वो अच्छा ही होता है हो सकता है आज हमारे साथ कोई समस्या हो। और इस पर हम ईश्वर को दोष दे रहे हों। लेकिन कल का किसे पता हो सकता है।

ईश्वर ने हमारे लिये कुछ उससे भी बेहतर करने की सोच रखी हो तो बस धैर्य रखिये वक़्त के साथ जो होता है सब अच्छा होता है बस हमें बुरा लगता है बस कई बार थोड़ा ज्यादा वक्त लग जाता है उसका परिणाम आने में।

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