Kabir Ke Dohe कबीर दास जी के life चेंजिंग दोहे

Kabir Das Ke Dohe in hindi कबीर दास जी के life चेंजिंग दोहे कबीर जी के दोहे, के बारे में पढ़ेंगे और अपनी ज़िन्दगी को बदलने की कोशिश करे, और कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती है ये तो आप जानते ही हो। Kabir Ke Dohe जिसने कोशिश नहीं की वो कहाँ जीत सकता है जिसने कोशिश की और हार भी गया तब भी वह जीत जाता है। 

Kabir Das Ke Dohe

Kabir Das Ke Dohe – कबीर दास जी के life चेंजिंग दोहे

1.बोली एक अनमोल है, जो कोई बोले जानि ,
हिये तराजू तोली के, तब मुख बाहर आनि।

भावार्थ 🔻

यदि को सही तरीके से बोलना जानता है तो उसे पता है की वाणी एक अमूल्य रत्न है।
इसलिए वह ह्दय के तराजू में तोलकर ही अल्फ़ाज़ को उसे मुँह से बाहर आने देता है। 

2. हिन्दू कहें मोहि राम पियारो, तुर्क कहें रहमाना
आपस में दोउ लड़ी-लड़ी मुए, मरम न कोउ जाना। 

भावार्थ 🔻

कबीर कहते है कि हिन्दू राम के भक्त है मुस्लिमको रहमान प्यारा है इसी बात पर
दोनों लड़ लड़ कर मौत मुंह में जा पहुंचे, तब भी दोनों में से सच कोई नही  जान पाया।

3.  चला हँसत हँसता, अपने याद न आवई, जिनका आदि न अंत।

भावार्थ 🔻

यह मनुष्य का स्वभाव है कि जब वह दूसरों के दोष देख कर हँसता है
तब उसे अपने दोष याद नहीं आते जिनका न  कोई आदि है और ना ही कोई अंत।

4. जिन खोजै तीन पाइया, गहरे पानी की पैठ,
में बपुरा बूडन डरा, रहा किनारे बैठ।

भावार्थ 🔻

जो प्रयत्न करते है ,वे कुछ न कुछ वैसे ही पा ही लेते हैजैसे कोई मेहनत करने वाला
गोता खोर गहरे पानीमें जाता है और कुछ लेकर आता है लेकिन कुछ बेचारेऐसे भी होते है
जो डूबने के डर से किनारेपर ही बैठे रह जाते है और कुछ नहीं कर पाते। 

5.  माला फेरत जुग भया , फिरा न  मन फेर का फेर,
कर का मनका डार दे , मन का  मनका  फेर। 

भावार्थ 🔻

कोई व्यक्ति लम्बे समय तक हाथ में लेकर मोती की मालातो घूमाता है
पर उसके मन का भाव नहीं बदलता, मन की हलचल शांत नहीं होती, कबीर की ऐसे
व्यक्ति को सलाह है की हाथ  माला कोफेरना छोड़कर मन के मोतियों को बदलो या फेरो।

Kabir Ke Dohe – कबीर के दोहे  

6. साधू सा चाहिए , जैसा सूप सुभाय ,
सार सार को गहि रहै है , थोथा देई उड़ाय।  

भावार्थ 🔻

इस संसार में ऐसे Logo की जरूरत है  जैसे अनाज  Clean करने वाला सूप होता है।
जो सार्थक को बचा लेंगे और निरर्थक को उड़ा  देंगे। (Kabir Ke Dohe)

7. जब गुण  को गाहक मिले , तब गुण लाख बिकाई।  

भावार्थ 🔻

कबीर जी कहते है की जब गुण को परखने वाला गाहक मिल जाता है
तो गुण  की कीमत होती है पर जब  गाहक नहीं मिलता,तब गुण कोड़ी के भाव चला जाता है। 

8.  कबीर कहा गरबियो , काल गहे कर केस।  

भावार्थ 🔻

कबीर  कहते है कि  हे मानव ! तू  Kya गर्व करता है काल अपने Haatho
में तेरे केश पकडे हुए है  मालुम नहीं , वह घर या प्रदेश में कहाँ पर ,तुझे मार डाले।

9.  पानी केरा बुदबुदा ,अस मानुस की जात। 

भावार्थ 🔻

कबीर जी कहते है कि जैसे पानी के बुलबुले, इसी प्रकार मनुष्य का शरीर क्षण भंगुर है
जैसे प्रभात होते ही तारे छिप जाते हैवैसे ही ये देह भी एक दिन नष्ट हो जायेगी।

10. हाड़ ज्यूँ लाकड़ी, केस जले ज्यूँ  घास।  

भावार्थ 🔻

यह नश्वर मानव देह अंत समय में लकड़ी की तरह जलती है और बाल “केश ” घास
की तरह जल उठते है सम्पूर्ण शरीर को इस तरह जलता देख ,कबीर जी भावुक हो जाते है 

11. जो उग्या सो अन्तबै, फूल्या सो कुमलाहीं। 

भावार्थ 🔻

इस संसार का यही नियम है कि जो उदय हुआ है वह अस्त होगा। जो विकसित हुआ है
वह मुरझा जाएगा जो चिना गया है वह गिर पड़ेगा। और जो आया है वह जाएगा।

12. झूठ सुख को सुख कहे , मानता है मन मोद। 

भावार्थ 🔻

कबीर जी कहते है की अरे जीव ! तू झूठे सुख को  Sukh कहता है और मन में प्रसन्न होता है
देख यह सारा संसार मृत्यु के लिए उस भोजन के समान है
जो कुछ तो उसके मुंह (Mouth) me Hai.और कुछ गोद में खाने के लिए रखा है। 

13. संत न छोड़े संतई , जो कोटिक मिले असंत।  

भावार्थ 🔻

सज्जन को चाहे करोड़ो Dushet पुरुष मिले फिर भी वह अपने भले स्वभाव को नही छोड़ता।
चन्दन के पेड़ से सांप लिपटे रहते है लेकिन वह अपनी शीतलता नहीं छोड़ता। 

14. कबीर तन पंछी भया, जहाँ मन तहाँ उड़ी जाइ। 

भावार्थ 🔻

कबीर कहते है की संसारी व्यक्ति का शरीर पक्षी बन गया है और जहाँ उसका मन होता है
शरीर उड़कर वहीँ पहुँच जाता है। सच है की जो जैसा करता है वह वैसा ही फल पा लेता है। 

15. तन को जोगी सब करें, मन को बिरला कोई।  

भावार्थ 🔻

 शरीर में भगवे वस्त्र धारण करना Asaan है  पर मन को योगी बनाना बिरले ही व्यक्तियों का काम है।
यदि मन योगी हो जाए तो सारी सिद्धियाँ  सहज ही प्राप्त हो जाती है।

Kabir Das Ke Dohe  in Hindi – कबीर दास जी के life चेंजिंग दोहे

16. कबीर सो धन संचे , जो आगे को होय। 

भावार्थ 🔻

कबीर कहते है की उस धन को Jodo जो भविष्य में काम आए।
सर पर धन की गठरी बाँध कर ले जाते तो Kisi को नहीं देखा।

17.  माया मुई न मन मुआ , मरी मरी गया शरीर। 

भावार्थ 🔻

कबीर  कहते है की संसार में रहते हुए न माया मरती है न ही मन।
शरीर न जाने कितनी बार मर चूका  पर मनुष्य की आशा और तृष्णा कभी नहीं मरती।

18.  दुःख में सुमिरन सब करे , सुख में करे न कोय।
जो सुख में सुमिरन करे दुःख काहे को होय।।

भावार्थ 🔻

कबीर दास जी कहते है की Dukh ke Time सभी  भगवान को याद करते है
पर Sukh में कोई नहीं करता यदि सुख में भी God को याद किया जाए तो दुःख हो ही Kyo. 

19. साईं इतना दीजिये, जा में कुटुम समाय।
में भी बुखा न रहूँ , साध न बुखा जाए। 

भावार्थ 🔻

कबीर दास जी कहते है की परमात्मा तुम मुझे इतना दो की जिसमें बस मेरा गुजारा चल जाए,
में खुद भी अपना पेट पाल सकूं, और आने वाले मेहमानों को भी भोजन करा सकूं।

20. काल करे सो जो आज कर, आज करे सो अब।
पल में प्रलय होएगी , बहुरि करेगा कब। 

भावार्थ 🔻

कबीर दास जी समय की महत्ता बताते हुए कहते है की जो कल करना है
उसे आज करो और जो आज करना है उसे अभी करो ,
कुछ ही समय में जीवन खत्म हो जाएगा। फिर क्या करोगे तुम ? 

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