कैरोली टेक्सस की कहानी Karoly Takacs Story

karoly takacs in hindi कैरोली टेक्सस की कहानी प्रेरक कहानी , कैरोली टेक्सस का जन्म 21 जनवरी 1910 को हंगरी ऑस्ट्रिया में हुआ था। Karoly Takacs Story in hindi कैरोली एक बेहतरीन शूटर था। उसका निशाना इतना बेहतरीन था। कि देखने वाले दातों तले उँगली दबाने पर मज़बूर हो जाते थे।

क्योंकि उसका निशाना कभी नहीं चूकता था। अपने target को लेकर इतना focused, अपने काम को लेकर इतना dedication लोगों के लिए चर्चा का केंद्र था। कैरोली अपने देश की आर्मी hungarian Army में काम करता था।

Karoly Takacs ने स्टेट लेवल और नेशनल लेवल की लगभग सभी प्रतियोगिताओं में अवार्ड जीते। और इतना ही नहीं उनमें पहला स्थान हासिल किया।वो जहाँ भी किसी भी प्रतियोगिता में हिस्सा लेने जाता, जैसे ही लोगों को पता चलता। कि कैरोली भी प्रतियोगिता में हिस्सा ले रहा है। तो लोग भारी संख्या में इकठ्ठा हो जाते थे।और लोग hooting के साथ उसका स्वागत करते थे। वो भी उनकी उम्मीदों पर हमेशा खरा उतरता था।

और बेहतरीन प्रदर्शन करता था। उसको लेकर लोग बहुत उत्साहित रहते थे। सब तरफ से अवार्ड और मेडल जीतने के बाद अब कैरोली का एक ही सपना था कि वो आने वाले ओलंपिक में स्वर्ण पदक जीतकर अपना और अपने देश का नाम रोशन करे।

और उसके लिए उसने कडा अभ्यास करना भी शुरू कर दिया था। 1940 में ओलम्पिक गेम होने थे। सबको पता था के कैरोली उसमें गोल्ड मेडल जरूर जीतेगा। खुद कैरोली को भी इस बात का पक्का यकीन था।

लेकिन ओलंपिक से दो साल पहले 1938 में आर्मी के एक ट्रेनिंग कैम्प में ट्रेनिंग के दौरान एक हादसा हो गया। एक हैंड ग्रेनेड उसके हाथ में ही फ़ट गया। और उसने अपना best training hand गँवा दिया। जी हाँ… दुर्भाग्य से वो उसका दायाँ हाथ था।

Karoly Takacs Story in hindi

Karoly Takacs Story – कैरोली टेक्सस की कहानी

अब कैरोली के दुख की कोई सीमा न थी। हाथ गवांए जाने के दौरान जो दर्द हुआ। वो तो उसके सामने कुछ भी न था। जो दर्द उसने ये सोचकर महसूस किया के उसका सपना टूट चुका है । ओलंपिक  में मैडल जितने का सपना। सब कुछ खत्म हो चुका था। लोगों की उम्मीदें भी टूट कर बिखर चुकी थी।

सबको ये conform था के अब कुछ नहीं हो सकता क्योंकि उसका best traind हाथ ही नहीं रहा था। सब लोग निराश हो चुके थे। सबने कैरोली का दुर्भाग्य समझ कर उससे उम्मीदें तोड़ ली थी। क्योंकि अब कुछ हो भी नहीं सकता था। कैरोली के पास अब एक ही हाथ था। वो भी उसका बायां हाथ।

जिससे वो पैन पकड़कर कुछ लिख भी नहीं सकता था। उसको बाएं हाथ से खाने पीने। अपने रोजमर्रा के काम को करने में भी दिक्कतें आती थी। तो उससे निशाना लगाना कहाँ सम्भव था। क्योंकि उसने सारी जिंदगी अपने right हाथ से काम किया था। जैसा कि ज्यादातर लोग करते हैं।

और उसी को शूटिंग के लिए traind किया था। अब एकदम से हाथ के ना रहने से उससे shooting की उम्मीद करना। और वो भी ओलंपिक में well trained लोगों से comptete करना अपने आप में नामुमकिन ही था। अब उसके पास दो ही रास्ते थे । या तो वो रोये चिल्लाये अपनी किस्मत को कोसे और किसी के भी सामने न आये और अपनेआप को गम के अंधेरे में डूबा ले।

कैरोली टेक्सस की कहानी –  karoly takacs story in hindi

दूसरा रास्ता ये के जो उसने खो दिया उसके बारे में ना सोचकर जो उसके पास है उसके बारे में सोचे और उसी के बारे में focus करे। और उसने दूसरा रास्ता ही चुना और ठाना के अब मेरे पास जो है  यानि उसका left hand उसी को ट्रैंड करूँ और अपने टारगेट को achive करूँ। उसको लगभग एक महीना हो चुका था अब वो ठीक होने के करीब था।

जैसे ही वो ठीक हुआ उसने अगले दिन से ही अपनी tarining शुरू कर दी। पहले से भी ज्यादा मेहनत क्योंकि उसे पता था दो साल बाद ओलंपिक गेम है। और मुझे गोल्ड मेडल जीतना है। वो बेहतर और बेहतर होता गया। हर रोज़ कड़ी मेहनत करता। दिन देखता ना रात और कैरोली लगातार अपने लक्ष्य की ओर बढ़ता चला गया। और किसी को बताया भी नहीं के वो अब भी preactice कर रहा है।

सन 1939 की बात है कि national गेम हो रहे थे। कैरोली अपनी पूरी तैयारी के साथ वहां पहुँचा। तो वहाँ पर और भी बहुत सारे खिलाड़ी भाग लेने पहुँचे हुए थे वो सब कैरोली को देख कर  पहले तो आश्चर्य में पड़े।

फिर बोले के वाह …sir स्वागत है आपका …ये होती है खेल भावना इतना कुछ होने के बाद भी आप यहाँ हमारा होंसला बढाने के लिए आये आपका धन्यवाद।

ये सुनकर कैरोली ने कहा…मैं यहां तुम लोगों का हौंसला बढ़ाने ही नहीं बल्कि प्रतियोगिता में हिस्सा लेने आया हूँ। ये सुनकर किसी को भी विश्वास नहीं हुआ। अब उनको क्या पता था कि कैरोली इतने दिन से अभ्यास कर रहा था। खैर… कैरोली ने प्रतियोगिता में हिस्सा लिया और ना सिर्फ हिस्सा लिया बल्कि first भी आया। सब हैरान परेशान थे

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के उसने आखिर ये सब किया कैसे। जो आदमी  कुछ दिन पहले अपने left hand से कुछ भी काम perfectly नहीं कर पाता था। जिस आदमी का trainend हाथ जा चुका था। उसी आदमी ने अपने only hand से भी सबको पछाड़ दिया। ये सुनकर कैरोली ने कहा…मैं यहां तुम लोगों का हौंसला बढ़ाने ही नहीं बल्कि प्रतियोगिता में हिस्सा लेने आया हूँ।

ये सुनकर किसी को भी विश्वास नहीं हुआ। अब उनको क्या पता था कि कैरोली इतने दिन से अभ्यास कर रहा था। खैर… कैरोली ने प्रतियोगिता में हिस्सा लिया और ना सिर्फ हिस्सा लिया बल्कि first भी आया। सब हैरान परेशान थे के उसने आखिर ये सब किया कैसे। जो आदमी  कुछ दिन पहले अपने left hand से कुछ भी काम perfectly नहीं कर पाता था। 

जिस आदमी का trainend हाथ जा चुका था। उसी आदमी ने अपने only hand से भी सबको पछाड़ दिया। अब कैरोली का आत्मविश्वास बढ़ चुका था। और उसने अपना सारा focus 1940 के ओलम्पिक पर कर दिया। लेकिन बदकिस्मती तो देखिए first world war की वजह से 1940 में होने वाले ओलंपिक गेम cancel हो गए।

कैरोली को बहुत निराशा हुई । लेकिन उसने तो जैसे हिम्मत ना हारने की ठान रखी थी। उनके अपना target 1944 के ओलम्पिक को बनाया। के अगली बार तो मैं हर हाल में मैडल जीतूंगा। मगर दुर्भाग्य ने यहाँ भी उसका साथ नही छोड़ा। विश्व युद्ध के कारण ही 1944 के ओलंपिक को भी रद्द कर दिया गया।

अब कैरोली को फिर से निराशा हताशा का सामना करना पड़ा। अब कैरोली  34 साल का हो चुका था । उम्र ढलान पर थी। दोस्तों आपकी जानकारी के लिए बता दूं। दुनिया के किसी भी गेम में कोई भी खिलाड़ी शीर्ष पर क्यों ना हो।

लेकिन एक उम्र के बाद उसके प्रदर्शन पर उम्र हावी हो ही जाती है। जो अच्छे से अच्छे खिलाड़ी के प्रदर्शन को भी कम कर देती है। और जितना अच्छा कोई भी खिलाड़ी युवा अवस्था मे कर सकता है। उम्र के ढलान पर वो उतना अच्छा प्रदर्शन चाह कर भी नहीं कर सकता।

बस यही डर कैरोली को भी सता रहा था। क्योंकि 34 का वो हो चुका था और उसको 4 साल इंतजार और करना था।यानी 1948 तक उस समय पर अगर सबकुछ ठीक रहा तो उसकी उम्र 38 हो चुकी होगी।और उसके साथ comptete करने वाले ज्यादातर खिलाड़ी काफी युवा होंगे।

जिससे उसको दिक्कत आ सकती थी।लेकिन कैरोली इतने जल्दी हार मानने वालों में नहीं था। नामुमकिन शब्द तो जैसे उसकी dictonary था ही नहीं। और उसने सबकों चौकाते हुए। फिर से अपना लक्ष्य अगला ओलंपिक रखा। और फिर से वही मेहनत शुरू कर दी।

लोगों की उम्मीद भले ही कैरोली से कुछ कम हुई हो लेकिन करोली ने तो जैसे ज़िद पकड़ी हुई थी। मैडल चाहिए तो चाहिए। और फिर वक्त आया 1948 का। जिस दिन का कैरोली को बडी बेसब्री के साथ इंतजार था। गेम हुए कैरोली ने बेहतरीन से बेहतरीन प्रदर्शन किया। और पहला स्थान लेकर गोल्ड medal जीता।

और अपने इतने सालों की मेहनत का  स्वाद चखा।लेकिन कैरोली तो नजाने किस मिट्टी का बना हुआ था। वो सिर्फ़ इतने में संतुष्ट होने वालों में से नहीं था। उसने ठाना की मुझे अगले ओलंपिक में भी एक मैडल जितना है। अगले ही दिन से उसने 1952 में होने वाले ओलंपिक की जोरों से तैयारी शुरू कर दी। और ना सिर्फ़ तैयारी की बल्कि 1952 के ओलम्पिक में भी एकदम सटीक निशाने लगा कर पहला स्थान हासिल किया।

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गोल्ड मैडल जीतकर अपना व अपने देश का नाम रोशन किया। और वो भी 42 साल की उम्र में। जो बहुत बड़ी बात है। साथ ही इतिहास में अपना नाम स्वर्णिम अक्षरों में लिखवाया। कैरोली ने पूरी history ही बदल कर रख दी। क्योंकि इससे पहले किसी भी खिलाड़ी ने लगातार दो ओलंपिक में मैडल नहीं जीते थे।

लेकिन कैरोली तो नजाने किस मिट्टी का बना हुआ था। वो सिर्फ़ इतने में संतुष्ट होने वालों में से नहीं था। उसने ठाना की मुझे अगले ओलंपिक में भी एक मैडल जितना है। अगले ही दिन से उसने 1952 में होने वाले ओलंपिक की जोरों से तैयारी शुरू कर दी। और ना सिर्फ़ तैयारी की बल्कि 1952 के ओलम्पिक में भी एकदम सटीक निशाने लगा कर पहला स्थान हासिल किया।

और गोल्ड मैडल जीतकर अपना व अपने देश का नाम रोशन किया। और वो भी 42 साल की उम्र में। जो बहुत बड़ी बात है साथ ही इतिहास में अपना नाम स्वर्णिम अक्षरों में लिखवाया। कैरोली ने पूरी history ही बदल कर रख दी क्योंकि इससे पहले किसी भी खिलाड़ी ने लगातार दो ओलंपिक में मैडल नहीं जीते थे।

दोस्तों …कैरोली टैकसस का संघर्ष आज पूरी दुनिया के लिए। प्रेरणा देने वाला है। और हमें बताने वाला है की हमें कभी भी जीवन में हार नहीं माननी चाहिए। अगर हम अपने लक्ष्य के प्रति लगन और सच्ची भावना से मेहनत करेंगे। तो भले ही हमे सफलता मिलने में देरी हो जाये लेकिन एक ना एक दिन हमें सफलता ज़रूर मिलती है।

बस आपसे यही उम्मीद है कि जीवन में जब भी कभी आपको लगे के मेरे साथ परेशानियां ज्यादा है। इसलिए मैं कामयाब नहीं हो रहा हूँ। तो उसी पल कैरोली के संघर्ष  को याद कर लेना। क्या वाकई हमारे साथ इतनी ही समस्या है जितनी कैरोली के साथ में थी।

आपका जवाब होगा नहीं। अगर ऐसा ही है तो दोस्तों निराश होने की कोई ज़रूरत नहीं है आप एकाग्र होकर अपने लक्ष्य की तरफ बढ़ते रहिये। एक दिन सफलता आपके पाँव चूमेगी। इसी शुभ कामना के साथ अग़र आपको ये लेख पसंद आया हो तो आप इसको दोस्तों के साथ share कर सकते हैं।

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