Shamsher Bahadur Singh Biography In Hindi | शमशेर बहादुर सिंह का जीवन परिचय

 Shamsher Bahadur Singh Biography In Hindi शमशेर बहादुर सिंह  का जीवन परिचय, शमशेर बहादुर सिंह नारायण जी के बारे में पूरी जानकारी आज की पोस्ट में हम आपको देंगे। उन्हें “कवियों का कवि” कहा जाता था क्योंकि उनकी कविता ने कला के रूप को इतना ऊँचा उठा दिया था कि उसे मिलाना या उसे किसी उच्च बिंदु पर ले जाना मुश्किल लग रहा था।

वह उन कुछ कवियों में से एक थे जिन्होंने अपनी राजनीतिक विचारधारा और विश्वदृष्टि को पूर्ण अभिव्यक्ति देते हुए नए सौंदर्य मानकों को स्थापित करने के आदर्श को सफलतापूर्वक प्राप्त किया।

Shamsher Bahadur Singh Biography In Hindi

Shamsher Bahadur Singh Biography In Hindi

नई कविता में शमशेर बहादुर सिंह का महत्वपूर्ण स्थान है उनका काव्य तथा व्यक्तित्व बहुमुखी तथा विविधता पूर्वक है। उनका जन्म 13 जनवरी 1911 ई० को देहरादून में एक जाट परिवार में हुआ उनके पिता का नाम बाबू तारीफ सिंह था जो कि बड़े ही निष्ठावान सरकारी नौकर थे।

उनकी माता का नाम प्रबुदेई था। वे बड़े ही धार्मिक विचारों वाली स्त्री थी माता के देहात के बाद पूरा परिवार बिखर गया और पिता ने दूसरी शादी कर ली। शमशेर का विवाह धर्म वती से हुआ। उनके और मिक शिक्षा देहरादून में हुई उन्होंने 1928 में हाई स्कूल तथा

1933 में प्रयाग विश्वविद्यालय में b.a. की परीक्षाएं पास की। और उन्होंने अंग्रेजी विषय में m.a. करनी चाही परंतु सफला नहीं हो सके बाद में दिल्ली के उकील बंधुओ के ” कला विश्वविद्यालय ” में पेंटिंग सीखने लगे।

लेकिन शीघ्र ही वापिस देहरादून लौट आए और अपने ससुर की केमिस्ट की दुकान में कंपाउंडर का काम करने लगे। उनका संपूर्ण जीवन प्राय अस्थिर ही रहा। 1993 ई० मैं अहमदाबाद मैं उनका देहांत हो गया।

Shamsher Bahadur Singh – शमशेर बहादुर सिंह जी की प्रमुख रचनाए

शमशेर ने गद्य तथा पद्य दोनों में कुशलता पूर्वक लिखा है ।” कुछ कविताएं” (1959) ,’ शमशेर ‘ (1971) ,” चुका भी हूं नहीं मैं (1975) , ‘इतने पास अपने ‘ (1980) , ‘ उदिता ‘ (1980) , ‘ बात बोलेगी (1981) आदि उनकी प्रमुख रचना है।

उन्होंने सं 1932 – 33 में लिखना आरंभ किया था तथा उनकी आरम्बिक रचनाए ” सरस्वती ” तथा ” रूपाब ” में प्रकाशित हुई। सन 1951 मैं प्रकाशित दूसरे तार सप्तक में उनकी रचनाएं भी सम्मिलित की गई सन 1917 में उन्हें ” दो मोती के दो चंद्रमा होते ” रचना पर साहित्य अकादमी पुरस्कार द्वारा सम्मानित किया गया। 

शमशेर बहादुर सिंह जी की काव्यगत विशेषता

उनके काव्य की प्रमुख विशेषताएं निम्नलिखित है –

( क ) राष्ट्रीय चेतना :- शमशेर जी की आरंभिक कविताओं में देश प्रेम की भावना देखी जा सकती है। कवि ने स्वतंत्रता पूर्व अंग्रेजी शासकों के अत्याचारों को समीप से देखा। उन्होंने अपनी कविताओं में अंग्रेजी राज्य की क्रूरता तथा हिंसा का यथार्थ वर्णन किया है। सन 1944 में अंग्रेजी सरकार ने मजदूरों पर गोलियां चलवाई थी इस संदर्भ में कवि लिखता है ।

” यह शाम है कि आसमान खेत है आपके हुए अनाज कालपक उठी लहू से भरी दरातियां की आग है धुआ धुआ सुलग रहा ग्वालियर के मजबूर का हदय।”

( ख ) माक्र्सवादी चेतना :- शमशेर जी स जी सन 1938 में माक्र्सवाद की ओर आकृष्ट हुए थे। 1945 में कम्युनिस्ट पार्टी के कम्यून में रहे वहीं पर रहते हुए उन्होंने नया साहित्य का संपादन भी किया। वह मानवता के उज्जवल भविष्य के लिए माक्र्सवाद को आवश्यक मानते थे इसलिए एक स्थल पर लिखते हैं ।

” वाम- वाम – वाम दिशा समय साम्यवादी “

(ग) सामाजिक चेतना :- शमशेर जी के काव्य में सामाजिक चेतना भी देखी जा सकती है उनका कहना था कि व्यक्ति अपने आप में समाज का ही एक अंश है। अतः कवि को अपनी भावनाएं समाज के सत्य के संदर्भ में व्यक्त करनी चाहिए। इसीलिए वह समाज के कटुतम अनुभवों को अपने कविताओं में प्रस्तुत करते हुए दिखाई देते हैं।

” मैं समाज तो नहीं, न मैं कुल जीवन, कण समूह में हूं मैं केवल एक कण “

Shamsher Bahadur Singh In Hindi

(घ) वैयक्तिक अनुभूति :- शमशेर जी ने अपनी कविताओं में अपनी निजी संवेदना को व्यक्त किया है। उन्होंने अपने जीवन में जो कुछ होगा और जो कुछ पाया उन्ही अनुभूतियों को वह यत्र तत्र अनुभव करते रहे। उन्होंने अपने प्रणय संबंधों को स्वीकार किया और प्रेमी तथा प्रेमिका के एकदम की स्थापना पर बल दिया वे एक स्थल पर लिखते रहे –

” मैं तो साए से बंधा सा दामन में तुम्हारे ही कही ग्रह सा तुम्हारे साथ “

(ङ) प्रेम और सौंदर्य :-  मूलतः शमशेर जी प्रेम और सौंदर्य के कवि माने जाते हैं उनकी कविता में प्रेम का रंग बड़ा ही गहरा है। वह प्रेम और सौंदर्य का परस्पर संबंध स्थापित करते नजर आते हैं। वे प्रियसी को जीवन का सर्वस्व मानते हैं तथा वादा करके मुकर भी जाते हैं।

“वो कल आएंगे वादे पर मगर कल देखिए कब हो?
गलत फिर हजरते दिल आपका तख़्मीना होना हैं ।”

(च) मानवतावाद :- शमशेर जी का काव्य देश और काल की सीमा में बंधा नहीं है वह मानवीय चेतना से अधिक विश्वास रखते थे। और विश्व बंधुत्व की भावना को अधिक महत्व देते थे कवि ने नवीन तथा प्राचीन और पूरब पश्चिम में कोई भेज स्वीकार नहीं किया। कारण यह था कि वह अपनी कविता में मानव को ही अधिक महत्व देते हैं एक स्थल पर वे लिखते हैं –

” बहुत होले होले नाच रहा हूं सब संस्कृतिया मेरे सरगम में विभोर हैं। 

क्योंकि मैं हदय की सच्ची सुख शांति का राग हूं बहुत आदिम , बहुत अभिनव ।”

इसी प्रकार कवि ने अपनी कविताओं में जहां एक और प्रकृति चित्रण किया है। वहीं दूसरी ओर बाह्य आंडबरो तथा रूढ़ियों का विरोधी किया है। वह जीवन में मृत्यु की हस्ती को भी स्वीकार करते हैं। और मृत्यु को अपनी प्रेमिका मानते हैं।

Shamsher Bahadur Singh Biography In Hindi भाषा शैली

शमशेर बहादुर सिंह ने अपने साहित्य में सहज सरल एवं साहित्य का हिंदी भाषा का प्रयोग किया है। कहीं-कहीं वे उर्दू भाषा के शब्दों का अधिक प्रयोग करने लगते हैं उन्होंने भाषा तथा छंद की दृष्टि से अनेक प्रयोग किए हैं। उनकी भाषा में चित्रात्मकता , धन्यात्मकता , लयात्मकता , नाद सौन्दर्य आदि गुण देखे जा सकते हैं।

मूलतः उनका काव्य प्रतिको तथा बिम्बो के लिए प्रसिद्ध हैं उनके बारे में रंजना अरगड़े लिखती हैं –

“शमशेर को कवियों का कवि इसी अर्थ में कहते हैं कि उनकी कविता में हिंदी भाषा की अभिव्यक्ति क्षमता कृति खुलती नजर आती है ऐसी बात नहीं है कि उन्होंने हिंदी भाषा को व्यक्ति के उच्चतम शिखर तक पहुंचा दिया है पर आने वाले कवियों के सक्षम उन्होंने अनेक संभावनाएं खोल दी है। “


इन्हें पढ़े 


Shamsher Bahadur Singh ji आखिरी बार गायत्री मंत्र का जाप किया

12 मई 1993 को शमशेर बहादुर सिंह ने दुनिया को अलविदा कह दिया। अपने अंतिम दिनों के बारे में, 2011 में अहमदाबाद में गुजरात विश्वविद्यालय में हिंदी विभाग की अध्यक्ष रह चुकीं रंजना अर्गड़े कहती हैं

कि जब दिल का दौरा पड़ा, तब अस्पताल में 72 घंटे से भी कम का समय था। उसे शायद अंदाजा हो गया था कि दुनिया को अलविदा कहने का समय आ गया है। वह कहती है कि जब उसने शमशेर से पूछा कि वह क्या सुनना चाहता है।

उसने सोचा कि शायद शमशेर गालिब या कुछ और सुन रहा होगा, लेकिन उसने उन सभी को मना कर दिया। रंजना के हवाले से एक मीडिया रिपोर्ट में, रंजना याद करती हैं कि शमशेर ने अपने आखिरी समय में गायत्री मंत्र का पाठ करने की इच्छा व्यक्त की थी।

मैं गायत्री मंत्र का जाप कर रहा था और वे एक साथ जा रहे थे। मंत्र बोलते समय, जब वे चुप हो गए, तो मुझे पता था कि वे नहीं रहे।

Shamsher Bahadur Singh In Hindi से संबंधित FAQ 

1. शमशेर बहादुर सिंह जी की मृत्यु कब हुई थी?

1993 ई० मैं अहमदाबाद मैं उनका देहांत हो गया।

2. शमशेर बहादुर सिंह ने कौन  सी कविता लिखी?

ये हैं प्रमुख कविताएं” मेरे इतने करीब, ‘मैंने अभी भी पूरा नहीं किया,’ मैं बोलूँगा, ‘उदिता’ और ‘काल तुझसे वोदी है मेरी’ शामिल हैं। प्रयोगवाद और नई कविता के प्रमुख कवियों में से एक शमशेर ने अपनी कविताओं से लोगों का दिल जीतने का एक भी मौका नहीं छोड़ा।

3. अपनी पत्नी की मृत्यु पर शमशेर बहादुर सिंह ने कौन सी कविता लिखी?

शमशेर बहादुर सिंह अंग्रेजी कवि एज्रा पाउंड से काफी प्रभावित थे। निराला को उनका प्रिय कवि कहा जाता था। अपनी पत्नी की मृत्यु पर शमशेर बहादुर सिंह ने उन्होने कविता लिखी है-

  • भूल जाओ जब
  • जब जब रहो
  • मैं भटका
  • आप चमक रहे हैं
  • तुम्हारे लिए मेरी आंखें बनो

4. शमशेर बहादुर सिंह के माता पिता का क्या नाम था?

शमशेर बहादुर सिंह के माता पिता का नाम उनके पिता का नाम बाबू तारीफ सिंह था जो कि बड़े ही निष्ठावान सरकारी नौकर थे। उनकी माता का नाम प्रबुदेई था।

5. शमशेर बहादुर सिंह जी की मृत्यु कब हुई थी?

शमशेर बहादुर सिंह जी की मृत्यु 12 मई 1993 को शमशेर बहादुर सिंह ने दुनिया को अलविदा कह दिया।

6. शमशेर बहादुर सिंह को हिंदी साहित्य में क्या कहा जाता है

शमशेर बहादुर सिंह को हिंदी साहित्य में माँसल एंद्रीए सौंदर्य के अद्वीतीय चितेरे कहा जाता है

7. इतने पास अपने किसकी रचना है?

इतने पास अपने शमशेर बहादुर सिंह जी की रचना है

8. बात बोलेगी किसकी रचना है?

बात बोलेगी शमशेर बहादुर सिंह जी की रचना है

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